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पावन चिंतन धारा आश्रम भारत की महान ऋषिकुल परंपरा का आश्रम है जो,                       ध्यान-साधना-तप पर आधारित है                       “राष्ट्र धर्म सर्वोपरि” के सिद्धांत में विश्वास रखता है                       धर्म, दर्शन व इतिहास का वैज्ञानिक शिक्षण देता है                       सेवा को आध्यात्मिक जीवन का प्रारंभ मानता है                       व्यक्तित्व की शुद्धता और गुणों के विकास हेतु प्रशिक्षण देता है                       कर्महीनता, अज्ञानता, अंधविश्वास व पाखंड से दूर रहने का आग्रह करता है                       अधिष्ठात्री– माँ दुर्गा                       प्रेरणा –स्वामी विवेकानंद                       प्रथम पूज्य- भारत माता                       छत्रछाया- धर्म ध्वज                       जीवन सूत्र- प्रभु नाम- प्रभु काम- प्रभु ध्यान                      

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ASHRAM PARIVAR SATSANG

Ashram Pariwar Satsang is held on last Sunday of every month in Ashram premises. The topics of the Satsang include ShreeGeeta, Mahabharat etc. wherein ShriGuru Ji provides the members in-depth knowledge about a particular subject. After the Satsang, there is a question-answer session wherein doubts related to the topics are answered by ShriGuru Ji. The members also sing and dance on devotional music.

 

|| साधक परिवार सत्संग (मई माह) ||

श्रीगुरुजी ने साधक परिवार सत्संग में बीज मंत्र का विशेष अभ्यास कराया| इसके उपरान्त महाभारत विषय पर पिछले छः माह से चल रहे महाभारत विषयक व्याख्यान पर सर्पों के उदय और समुद्र मंथन के कथाओं का वर्णन किया| श्रीगुरुजी ने बताया कि धर्म की उत्पत्ति क्यों हुई? धरती का उदय जब हुआ तो मानव की क्या स्थिति थी? समाज में अनाचार क्यों फैला? नियमों की आवश्यकता क्यों पड़ी? दैत्य कौन? दानव कौन? यक्ष और राक्षस कौन? नियमों में ईश्वर का वास क्यों? मन को शांत करने और साधने के तरीके क्या हैं? प्रभु को याद करने का सरल तरीका क्या है? आदि|

श्रीगुरुजी ने लोगों के मन पर भ्रमरूपी धूल झाड़ते हुए कहा कि महाभारत पीले कपड़े में लपेट कर रखने वाला ग्रन्थ नहीं है बल्कि स्वाध्याय करने का ग्रन्थ है| श्रीगुरु जी ने तक्षक की कथा का वर्णन करते हुए सर्प की वास्तविकता को विस्तार से बताया| नाग के बारे में बताया कि नाग कोई सांप नहीं बल्कि एक जाति है| श्री कृष्ण ने भी जिस कालिया नाग को मारा है वह भी कोई सर्प नहीं है बल्कि एक जाति है.

श्रीगुरुजी ने आगे क्षीरसागर का भी रहस्य बताया|

श्रीगुरुजी ने समुद्र मंथन के बारे में बताते हुए कहा कि यह मंथन इसलिए कि जो कुछ भी धरती के अन्दर छुपा है वो निकालना है| उस समय पेड़-पौधे, पशु-पक्षी आदि का उदय हुआ था|

श्रीगुरुजी ने आगे सृष्टि में जीव की उत्पत्ति का रहस्य विस्तार से बताया साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे जो धर्म-ग्रन्थ हैं वो विज्ञान की ठोस धरातल पर खड़े हैं|

सृष्टि चक्र के टूटने पर वासुदेव का उदय हुआ और वो केवल राधा वाले वासुदेव नहीं हैं बल्कि वो इस धरती पर धर्म की रक्षा करने वाले वासुदेव हैं| गीता का वर्णन करते हुए श्रीगुरुजी ने उपनिषदों का जो विस्तृत वर्णन किया है वह उनके बृहद स्वाध्याय का प्रमाण है| श्रीकृष्ण ने भी सीखा है, उन्होंने ऋषि कपिल से भी सीखा है| उन्होंने साधारण मनुष्य के इस भ्रम को भी दूर किया कि ऐसा नहीं कि राम, कृष्णा आये और उन्हें पढ़ें कि ज़रूरत नहीं हुई, उन्होंने भी खूब पढ़ा है|

श्रीगुरुजी ने धरती के उदय और अस्त का सिद्धांत भी समझाते हुए "श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण..." में नाथ शब्द के गूढ़ रहस्य को सरल तरीके से बताया|

उन्होंने हिम युग, जल युग आदि युगों का वर्णन भी किया| श्रीगुरुजी ने नाथ कि व्याख्या करते हुए बताया कि नाथ उसे कहा जाता है जो गिरते हुए को उठता है, जो टूटते को सहारा देता है| आगे की चर्चा में उन्होंने नर और नारायण पर्वत का भी वर्णन किया| नर पर्वत के रस्ते पर ही बद्रीनाथ और केदारनाथ है| बात ही बात में उन्होंने इस खतरे की ओर संकेत किया कि आगे इन धामों के रास्ते बंद हो जायेंगे और एक तीसरा धाम बनेगा जिसके नाम होगा भविष्य धाम| भजन के आनंद के साथ सत्संग अपनी चरमोत्कर्ष पर पहुंचा| इसके बाद श्रीगुरूजी ने सत्संग में आये जन समुदाय की शंकाओं का समाधान किया और सिद्ध ध्यान मंदिर में हनुमान चालीसा पाठ के साथ सत्संग का समापन हुआ|